CM Bhagwant Mann ने कहा: सरकार का जांच में हस्तक्षेप धर्म मामलों में नहीं माना जाए

पंजाब में 328 गायब पवित्र श्री गुरु ग्रंथ साहिब की प्रतियों को लेकर अकाल तख्त और पंजाब सरकार के बीच विवाद बढ़ता जा रहा है। CM Bhagwant Mann ने कहा है कि यह धार्मिक मामलों में दखलअंदाजी नहीं है। सरकार के पास गायब हुई प्रतियों की जांच करने का कानूनी अधिकार है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए यह जानना जरूरी है कि इन 328 पवित्र प्रतियों का स्वामित्व किसके पास है। जब किसी पवित्र ग्रंथ के अपमान की घटना होती है, तो सवाल उठते हैं कि पुलिस उस समय क्या कर रही थी। अब जब SIT (विशेष जांच दल) इन प्रतियों की खोज में लगी है, तो आरोप लगाया जा रहा है कि यह धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप है।
जगत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार एक्ट और SGPC की भूमिका
CM Bhagwant Mann ने बताया कि साल 2008 में विधानसभा में “जगत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार एक्ट” पास किया गया था। इस एक्ट के तहत श्री गुरु ग्रंथ साहिब की छपाई का अधिकार SGPC (शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक समिति) को सौंपा गया। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि जब यह एक्ट पास हुआ, उस समय सरकार का धार्मिक मामलों में कोई दखल नहीं था। उस समय सत्ता में शिरोमणि अकाली दल और भाजपा थे। उन्होंने SGPC की आंतरिक बैठक के फैसलों को भी सार्वजनिक किया, जिसमें 27 अगस्त 2020 को आयोजित बैठक में तय किया गया था कि एक उप-समिति का गठन किया जाएगा, जिसकी अध्यक्षता उस समय के SGPC जनरल सेक्रेटरी (अब अध्यक्ष) एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी करेंगे।

आंतरिक बैठक और कानूनी कार्रवाई के प्रस्ताव
मुख्यमंत्री ने बताया कि इस बैठक में अपराधियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने का प्रस्ताव भी रखा गया था। इसमें SGPC के पदाधिकारियों के खिलाफ बड़े पैमाने पर आपराधिक मामले शुरू करने का भी प्रस्ताव शामिल था। साथ ही, SGPC के CA सतिंदर सिंह कोहली से रिकॉर्ड प्राप्त करने और उनकी सेवाओं को 15 दिनों के भीतर समाप्त करने का निर्णय भी लिया गया, जो अब तक लागू नहीं हुआ। इसके कुछ दिन बाद हुई बैठक में यह तय किया गया कि SGPC स्वयं गायब प्रतियों की जांच करेगा और कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि अब अकाल तख्त का इस्तेमाल इस मामले में ढाल के रूप में किया जा रहा है।
अकाल तख्त की प्रतिक्रिया और मुख्यमंत्री का रुख
साल रविवार को अकाल तख्त साहिब में पांच सिख साहिबों की बैठक के बाद जत्थेदार कुलदीप सिंह गडगज ने कहा कि गायब 328 पवित्र ग्रंथों का मामला पंथिक और धार्मिक है और इसे SGPC स्वयं सुलझा सकता है। उन्होंने कहा कि सरकार का धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप अस्वीकार्य है। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इसे गलत ठहराया और कहा कि जब SIT संबंधित कर्मचारियों और अधिकारियों को समन भेजेगा, तब कई राज सामने आएंगे, इसलिए अकाल तख्त को ढाल के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि गडगज अभी पूर्णत: जत्थेदार नहीं बने हैं, क्योंकि उन्हें कई संस्थाओं द्वारा मान्यता नहीं दी गई है। इस प्रकार मामला धार्मिक और प्रशासनिक दोनों स्तर पर अब भी गहराता जा रहा है।